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त्यौहार यह शब्द सुनते ही मन मैं उल्हास, ख़ुशी और चमक सी आ जाती है.
लगभग सारे विश्व में साल कि आखिरी 4 महीनों में त्योहारों का माहौल रहता है. लगभग हर धर्म में, हर देश में इन महीनों में लोग कुछ ना कुछ मनाते है.
धर्म, देश, जाती, प्रदेश, पेशा कुछ भी कारण हो इन त्योहारों का, पर ख़ुशी, हसीं, दोस्ती, परिवार जरिया बनते है. और चाहे आप कोई भी रिवाज़ माने अपने अपने त्यौहार को मानाने कि लिए, हमेशा खाना, गाना या नाचना आपके साथी बनते है.
और 3 चीज़े जो त्यौहार को त्यौहार बनाती है, रंग, रौशनी और खुशबु. आप चाहे अगरबत्ती जलाये, या इत्र छिड़के या फूल बिखेरे खुशबु कि लिए. आप चाहे दिया, मोमबत्ती या रंग बिरंगी बिजली की लड़िया बांधे रौशनी कि लिए. आप चाहे रंगीन सजावट करें, चमकते कपड़े पहने, घर/ दीवारों से कंदील बांधे रंग के लिए. बिना इन तीन नेमतो के कोई भी त्यौहार पूरी तरह से त्यौहार नहीं बनता.
अगर सोचें तो यह तीनो भी एक दूसरे से मिलकर और भी निखरते हैं जैसे रंगीन बिजलिया जो रंग और रोशनी दोनों को साथ लिए चलती है या मेहकती मोमबत्तियां रोशनी और खुशबू बिखेरती हुई.
ऐसे में रसीली मिठाइयो की महक और लज़ीज़ खाने की खुशबु त्यौहार को चार चाँद लगा देते है. और इन सब को एक साथ मिलाती परिवार और दोस्तों की महफ़िले. हसीं ठिठोली से भारी हुई, मज़ाक, नोक - झोंक, संगीत, नृत्य, बातें कुछ काम की कुछ फ़िज़ूल की. सब एक साथ मिल कर किसी तारीख़ को त्यौहार बना देते हैँ.
कल दिवाली है, रौशनी का त्यौहार, सारे विश्व में हिन्दू धर्म को मानने वाले रंग रोशनी और खुशबू से दिवाली मनाएंगे.
पर धर्म कोई भी हो, त्यौहार कोई भी हो दिवाली या क्रिसमस या ईद या हनुक्का सब मनाये जाते हैं तो रंग, रोशनी और खुशबू को गहनों की तरह अलग अलग ढंग से पिरो कर. और फिर उस में खाने का स्वाद, दोस्ती, परिवार, ठहाके, कहानियां, गीत, और ढेर सारी मस्ती मिला कर.
एक प्रार्थना के साथ इस लेख को समाप्त करता हूँ कि आप जो इसे पढ़ रहे हैं उनके लिए यह दिवाली रंग, रौशनी और खुशबु से इतनी सराबोर हो कि आप के हर दुख को उल्हास में बदल दे. और आप अपने परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों के साथ मिल कर इस दिवाली और आने वाले सभी त्यौहार ( चाहे वो किसी भी धर्म या देश के हो ) उन्हें रंग, रौशनी और खुशबु सँग मनाये.
दीपावली की बहुत शुभकामनाएं !




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