कई साल पहले एक दार्शनिक को कहते सुना था "चर्चा बीमारी की होती है स्वास्थ्य की नहीं। हम लोग सिर्फ शिकायत की बात करते है अच्छी बातों की नहीं। (People mostly speak about bad health, bad fortune and rarely about the positive) मन माना नहीं पर ध्यान से देखा तो काफी बार यह बात सच थी. इस लिए कुछ पंक्तिया इस आदत को बदलने की कोशिश में !"
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कई बार शिकायत करते हैं
आज आओ खुशी की बात करें
ग़म-ए-जिंदगी को भूलकर
बस जिंदगी की बात करें
आज आओ खुशी की बात करें
ग़म-ए-जिंदगी को भूलकर
बस जिंदगी की बात करें
दोस्त नाराज़ या दोस्त से नाराज़गी
पर दोस्त आखिर दोस्त है, तो
पर दोस्त आखिर दोस्त है, तो
सब गुस्से गिले भूल भाल कर
क्यूँ ना आज बस दोस्ती की बात करें
क्यूँ ना आज बस दोस्ती की बात करें
बीते कल की याद हो
या आते कल की उम्मीद
इन दोनों कल को छोड़ दें
और आज, अभी की बात करें
या आते कल की उम्मीद
इन दोनों कल को छोड़ दें
और आज, अभी की बात करें
और कई बार शिकायत करते हैं
आज आओ खुशी की बात करें
ग़म-ए-जिंदगी को भूलकर
बस जिंदगी की बात करें
आज आओ खुशी की बात करें
ग़म-ए-जिंदगी को भूलकर
बस जिंदगी की बात करें

