Sunday, April 12, 2026

सफर-ए-लाइफ (Safar-e-life)

My new poem in hindi, for those who do not read hindi but can understand the language, I have added an audio link 

सफर-ए-लाइफ 

Click for Audio - "Safar-e-Life"


आगाज़ वही अंजाम वही
कहीं ज्यादा तो कहीं कम होगा
जिंदगी का सफर है, प्यारे
पैदाइश पे शुरू हुआ जब
तो मर के ही ख़तम होगा 



मुद्दा यह है की इस सफर में 
तुम किसी से क्या बाँटोगे?
जियोगे सफर भरपूर या बस 
यूँही वक़्त काटोगे 
अपनी तासीर का कौन सा 
हिस्सा छोड़ जाओगे
बस चले जाओगे या कोई 
किस्सा छोड़ जाओगे ?

इस सफर में कई और मुसाफिर जुड़ेंगे
कुछ साथ रहेंगे देर तक, कुछ कहीं और मुड़ेंगे
किस किस को याद रखोगे, दोस्त?
किस किस को याद आओगे?
वो हमसफ़र जिसका हर लम्हा फ़िक्र होगा 
उसकी यादों में शायद तुम्हारा भी ज़िक्र होगा?



किसी के सफ़रनामे की कड़ियाँ 
तुम्हारे सफर से जुडी होंगी 
कई मील जो साथ चले होंगे 
कई राहें साथ-साथ मुड़ी होंगी  

किसी मोड़ पे ख़ुशी की बारिश तो 
कहीं बिखरा ग़म का मौसम होगा 
आगाज़ वही अंजाम वही
कहीं ज्यादा तो कहीं कम होगा
जिंदगी का सफर है, प्यारे
पैदाइश पे शुरू हुआ जब
तो मर के ही ख़तम होगा 



8 comments:

  1. Replies
    1. Woow very well said. thank you for audio link. Beautifully written and narrated. Very thoughtful words and made me it made me hault and think about life.

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  2. Very true- Train that travels many places, some good and some bad ones and it’s last stop is at the end of life.

    Thanks for the audio!!

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  3. Lovely shareing, reality of life

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