Thursday, March 15, 2012

तुम उड़ने की आस न छोड़ो (Tum Udne ki aas na choro)

तुम उड़ने की आस न छोड़ो 
                                                                निखिल डोगरा 
पंख भी उगेंगे इन कन्धों पे 
तुम उड़ने की आस न छोड़ो

जब तक वो सच ना हो जाएँ 
तब तक उनको थामे रहना 
होते है नाज़ुक बड़े सपने 
तुम सपनो का हाथ ना छोड़ो 

डरने वाले को और डराओ 
रीत यही चली दुनिया की 
लाख डराना चाहे कोई 
तुम हिम्मत का साथ ना छोड़ो 

तुम खुद के मालिक हो खुद ही 
या फिर वो मालिक है जो सब का 
अपनी मेह्नत पे रखो भरोसा
तुम किस्मत पे बात ना छोड़ो 

छूना चाहो जब भी नभ को 
भले लगो तब पागल जग को 
बाहें फैलाओ आँखे मूंदो
और अपना विश्वास न छोड़ो
पंख भी उगेंगे इन कन्धों पे 
तुम उड़ने की आस ना छोड़ो 

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