Thursday, March 20, 2025

लम्हों के किस्से

 लम्हों के किस्से 



लम्हों को सहेज कर 
ज़हन के दामन में रख लेना 
लम्हा जब पनपा तो ता-उम्र 
का  किस्सा बन जायेगा 



काटना, बांटना, छांटना    
जैसे भी सुनाना उसे 
तुम्हारी शख्सियत तुम्हारे वजूद का
वो एक हिस्सा बन जायेगा 

हर महफ़िल में सब फिर
तुम्हारे किस्से याद करेंगे
उन किस्सों की  बातें
तुम्हारे साथ, तुम्हारे बाद करेंगे 
तुम किस्सों की जान बनना
किस्से तुम्हें ज़िंदा रखेंगे 

इसलिए 

लम्हों को सहेज कर 
ज़हन के दामन में रख लेना 
लम्हा जब पनपा तो ता-उम्र 
का  किस्सा बन जायेगा