Thursday, December 15, 2022

वक़्त की फितरत

 



वक़्त से दिल को लगा तो  ले मगर
वक़्त की फितरत है बदल जाता है
दिल बेचारा, मायूस  हो जाये तो 
फ़िर मुश्किल ही संभल पाता है

हम भी कभी तो बरामदे में बैठ कर 
वक़्त बदलते देखने का हुनर सीख लेंगे

दिल को वक़्त की गिरफ्त से आज़ाद कर के 
आरामकुर्सी पे, अलसाए तमाशाई बन के 
वक़्त की करवाटों का लुत्फ़ लेंगे
और तब वक़्त को मुनासिब लगा तो
एक आध लम्हा  उस से दिल भी लगा लेंगे,
मगर वक़्त की फितरत है बदल जाता है


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