Wednesday, September 7, 2022

कई सालों बाद

वो  रास्ते जिन पर मैं बढ़ा नहीं
वो मोड़ जिन्हे मैं मुड़ा नहीं
वो काम कभी जो किये नहीं
वो नाम कभी जो लिए नहीं
वो अच्छे थे या नहीं, क्या पता
पर अब दिल से माफ़ी उनको

शायद कोई रास्ता मंज़िल का होता
शायद कोई मोड़ महफ़िल का होता
शायद किसी काम से सिद्धि होती
शायद किसी नाम से दोस्ती होती
कुछ भला होता या नहीं, क्या पता
पर अब दिल से माफ़ी उनको


तुम पूछो तो कहता हूँ
कि क्या  सोचता रहता हूँ
किसी राह बढ़ जाता क्या?
किसी मोड़ मुड़ जाता क्या?
कोई नया काम कर जाता क्या?
कोई नया नाम पढ़ जाता क्या? 
तो क्या अब कुछ बदला होता?
अच्छा होता या नहीं , क्या पता
पर अब दिल से माफ़ी सबको





Some point in life one thinks about what one didn't do and wonders if any of those "not done" acts could have meant something? The confusion can be very personal. ................ My lines above are just an offer to make peace with that confusion....... Just offer an apology to past and future to enjoy the present.... Do you agree?

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